धागा वही, अंदाज नया: चिट्ठी वाली राखी से वीडियो कॉल तक पहुंचा रक्षाबंधन
राखी का डिजिटल रूप: अब ऑनलाइन बंध रहा भाई-बहन का प्यार

कटनी में भी दिखा बदलाव: बाजार में 20 वाली राखी से 2000 वाली राखी तक की धूम
रक्षाबंधन: धागा वही, जज्बात वही, पर बदला है अंदाज
कटनी। समय के साथ हर त्योहार का स्वरूप बदलता है, रक्षाबंधन भी इससे अछूता नहीं है। पहले की राखी और अब की राखी में धागा वही है, बहन-भाई का प्यार वही है, लेकिन तरीका पूरी तरह बदल गया है।
पहले चिट्ठी में आती थी राखी
करीब तीन दशक पहले तक बहनें अपने हाथों से राखी बनाती थीं। रंग-बिरंगे धागे, मोती और कपड़े से बनी राखी में आत्मीयता झलकती थी। भाई के घर आने का इंतजार होता था। जो बहनें ससुराल में होतीं, वे 10 दिन पहले डाक से राखी भेजती थीं। मिठाई के नाम पर घर की बनी गुजिया और लड्डू होते थे और बाजार में 1 से 5 रुपये में राखी मिल जाती थी।

अब ऑनलाइन है पूरा त्योहार
अब तस्वीर बदल गई है। बाजार में डिजाइनर, सिल्वर और फोटो वाली राखियां 500 से 2000 रुपये तक बिक रही हैं। अधिकांश बहनें अमेजन, फ्लिपकार्ट से राखी मंगवा रही हैं। जो बहनें विदेश या महानगरों में हैं, वे वीडियो कॉल पर राखी बांध रही हैं। गिफ्ट में अब नकदी की जगह यूपीआई, मोबाइल, घड़ी और ऑनलाइन वाउचर ने ले ली है।
स्थानीय बुजुर्ग रामकली बाई कहती हैं, “पहले राखी का इंतजार हफ्तों तक होता था, अब पल भर में वीडियो कॉल पर त्योहार हो जाता है।”
वहीं कालेज छात्रा प्रिया कहती है, “अब रक्षा का मतलब सिर्फ शादी तक साथ देना नहीं, बल्कि बहन की पढ़ाई और नौकरी में बराबर का साथ देना है।”
बदलाव के बावजूद भाई-बहन के रिश्ते की मिठास आज भी वैसी ही है, बस उसे मनाने का तरीका डिजिटल हो गया है।




