डीएफओ के आदेश भी हवा-हवाई, कटनी में धड़ल्ले से चल रही अवैध लकड़ी टाल और आरा मशीन
जांच के नाम पर लीपापोती! वीडियो आने के बाद भी वन विभाग ने नहीं की कार्रवाई

“फोन नहीं उठाया, जांच नहीं की: डीएफओ की लापरवाही से पनप रहा लमतरा में अवैध कारोबार”
*कटनी* पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण के सरकारी दावों के बीच कटनी वन विभाग की निष्क्रियता एक बार फिर उजागर हुई है। चाका ग्राम पंचायत के लमतरा गांव में हरे पेड़ों की अवैध कटाई और चिराई का मामला सामने आने के बाद भी विभाग ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें आरा मशीन परिसर में ताजा कटी तेंदू, जामुन, करही और बबूल की लकड़ी के गुरके रखे दिख रहे थे। वीडियो सामने आने के बाद जिला वन अधिकारी डीएफओ ने जांच के निर्देश तो दिए, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हुआ।
*जांच के नाम पर खानापूर्ति*
सूत्रों के अनुसार डीएफओ ने वीडियो और फोटो मंगवाकर मामले को संज्ञान में लिया था और मौके की जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी न तो टाल सील हुई, न ही अवैध आरा मशीन पर ताला लगा। टाल अभी भी पूरी रफ्तार से संचालित हो रही है।
*डीएफओ का रवैया: फोन नहीं उठाया*
मामले पर पक्ष जानने के लिए जब डीएफओ से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनके द्वारा फोन नहीं उठाया गया। विभाग के आला अधिकारी की इस उदासीनता से साफ है कि मामला गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां से हरे पेड़ों को काटकर गुरके बनाए जा रहे हैं, जिन्हें सुखाकर विभिन्न फैक्ट्रियों तक सप्लाई किया जा रहा है। आरा टाल संचालक कैमरे पर लाइसेंस होने का दावा जरूर कर रहा है, लेकिन मौके पर किसी भी तरह के वैध दस्तावेज नहीं दिखाए गए।
*वन विभाग की भूमिका सवालों में*
वन अधिनियम के अनुसार बिना अनुमति हरे पेड़ों की कटाई और बिना ट्रांजिट पास लकड़ी का परिवहन दंडनीय अपराध है। ऐसे में कार्रवाई न होने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर वन विभाग की चुप्पी क्यों है?
पर्यावरणविदों का कहना है कि एक तरफ सरकार “एक पेड़ मां के नाम” अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ कटनी में वन विभाग की उदासीनता के चलते हरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है।

अब देखना होगा कि मीडिया में खबर आने के बाद डीएफओ इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।




