दानदाता कृष्ण कुमार अग्रवाल चिंतित – “कृषि विद्यालय के लिए दी थी जमीन, सरकारी लापरवाही से बच्चे रह गए पीछे”
दानदाता बोले "बच्चों के लिए दी थी जमीन" और सिस्टम ने कर दिया बेकार - कृषि शिक्षा ठप

दानदाता कृष्ण कुमार अग्रवाल का दर्द: “बच्चों के भविष्य के लिए दी थी जमीन, 10 साल से कलेक्टर-विधायक-सांसद को दौड़ रहा हूं, कोई सुनवाई नहीं”
*कटनी/कन्हवारा।* शिक्षा और कृषि को बढ़ावा देने के लिए दान में दी गई जमीन भी सरकारी लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। कटनी जिले के *कन्हवारा स्थित सेठ महादेव प्रसाद अग्रवाल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय* को दान में मिली *लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि* आज भी असुरक्षित और बेकार पड़ी है।
*”बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दी थी जमीन”*
दानदाता *स्व. सेठ महादेव प्रसाद अग्रवाल* के वंशज *श्री कृष्ण कुमार अग्रवाल* ने `निडर आवाज` को बताया: _”यह जमीन खेतीहर जमीन थी। बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और कृषि शिक्षा के लिए हमने लगभग 5 एकड़ भूमि दान दी थी। लेकिन सरकारी उदासीनता देखिए, इतने सालों में सिस्टम जमीन तक सुरक्षित नहीं कर सका। आश्चर्य तो ये है कि अभी तक पानी तक की व्यवस्था है। जिस कारण से जमीन दी गई थी, उसके परिणाम भी सार्थक नहीं निकल रहे।”_

*कृषि संकाय चल रहा, पर प्रैक्टिकल नहीं*
स्कूल में *सन 2010-11 से कृषि संकाय* की पढ़ाई शुरू है। लेकिन जमीन पर *अब तक कृषि विद्यालय न बनने से न ही पानी की उपलब्धता होने* के कारण बच्चों को कृषि का प्रायोगिक ज्ञान नहीं मिल पा रहा है।
स्कूल के पूर्व प्राचार्यों ने भी कई बार उच्च स्तर पर पत्राचार किया। *28.12.2020* के पत्र में सांसद खजुराहो से मांग की गई थी कि _”कृषि की भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कृपा करें, जिससे छात्रों को कृषि संकाय की समुचित शिक्षा का सही लाभ मिल सके”_।

*कलेक्टर से भाजपा अध्यक्ष तक दौड़े, कार्रवाई शून्य*
श्री कृष्ण कुमार अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने इस मसले में *कटनी कलेक्टर, स्थानीय विधायक, सांसद और भाजपा जिला अध्यक्ष* तक से गुहार लगाई। *जनसुनवाई में भी 27.04.2022 से 2025 तक को शिकायत दर्ज* कराई, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा:”इतनी दौड़-धूप के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे मेरे पूर्वजों की कल्पना अधूरी प्रतीत हो रही है।”

*राजस्व रिकॉर्ड में भी दर्ज है जमीन*
तहसील कटनी नगर के *2023-2024 के भू-अभिलेख* में यह जमीन *”शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला कन्हवारा”* के नाम *कुल 1.8900 हेक्टेयर कृषि भूमि* के रूप में दर्ज है। बावजूद इसके जमीन की सुरक्षा नहीं हो सकी।
* निडर आवाज की मांग*
`निडर आवाज` जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और जनप्रतिनिधियों से मांग करता है कि दानदाता के सम्मान और बच्चों के भविष्य को देखते हुए *तुरंत 5 एकड़ जमीन में पानी की व्यवस्था और प्रैक्टिकल लैब* शुरू की जाए। अन्यथा दान का उद्देश्य और बच्चों का भविष्य दोनों बर्बाद हो जाएंगे।
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